महान व्यक्तित्व के सानिध्य में रहने से क्या आपके ग्रहों में बदलाव आता है...?
क्या अच्छे गुरु, मित्र या महान आदमी के सानिध्य में रहने से कमजोर ग्रहों की कुंडली वाले लोगों के ग्रहों में बदलाव आता है ? क्या है ज्योतिष के 6 बलों का वैज्ञानिक
नईदिल्ली। क्या अच्छे गुरु, मित्र या महान आदमी के सानिध्य में रहने से कमजोर ग्रहों की कुंडली वाले लोगों के ग्रहों में बदलाव आता है ? क्या है ज्योतिष के 6 बलों का वैज्ञानिक रहस्य ?
मनुष्य का मन हमेशा विचारशील रहता है। मन हमेशा अपनी खुशी के लिए सुख को ढूंढता रहता है। इसी खोज में मनुष्य गुरु की तलाश करता है। अगर अच्छे आचरण और अच्छे ग्रहों की कुंडली वाला गुरु मिल जाये तो मन को शांति और समाधान दोनों मिल जाते हैं। अब प्रश्न उठता कि ज्ञानी गुरु के सानिध्य से कमजोर ग्रहों के मनुष्य को कैसे लाभ मिलता है। इसका ज्योतिषीय आधार क्या है ?
ज्योतिष में 6 प्रकार के बल होते हैं। जिसमें 3 बल हमें किसी भी अच्छे गुरु से मिल सकते हैं। इसका मतलब यह हुआ अगर हमें भाग्य से ज्ञानी और गुणी गुरु मिल जाये तो ज़िंदगी में 50% सुधार किया जा सकता है। चेष्टा बल, युति बल और दृष्टि बल हम प्राप्त कर सकते हैं। इसलिए दार्शनिकों ने कहा कि अच्छे दोस्त या अच्छे गुरु की संगति से जीवन सफल हो जाता है। एक अच्छे गुरु को औरा बहुत बड़ा होता है। जब कोई कमजोर औरा वाला मनुष्य उनके नजदीक आता है तो ताकतवर औरा से ऊर्जा कमजोर औरा की तरफ परिवर्तित होने लगती है। इसलिए अच्छे लोगों की संगति से जीवन में बहुत परिवर्तन आते हैं।
अब प्रश्न आता है कि कुंडली के कमजोर ग्रह
मजबूत क्यों होने लगते हैं ? यह सत्य है कि मनुष्य का शरीर ग्रहों की तरंगों से संचालित होता है। किसी मनुष्य का जन्म के समय ग्रह कमजोर होता है तो किसी का बहुत शक्तिशाली होता है। यह एक ग्रहों के WIFI की तरह जुड़ा होता है। जैसे हमारा मोबाईल फोन कमजोर wifi से जुड़ा है और हम अचानक full signal वाले WIFI के नजदीक आते हैं तो हमारा मोबाइल उसको catch कर लेता है और उसकी स्पीड बढ़ जाती है। इसी सिद्धान्त पर जब मनुष्य फुल सिग्नल वाले गुरु से जुड़ता है तो उसके ग्रहों में परिवर्तन आता है।
अब इसको एक वैज्ञानिक उदाहरण से समझने की कोशिश करते हैं। मेडिकल विज्ञान कहता है कि अगर ताकतवर मनुष्य की हथेली के साथ कमजोर मनुष्य की हथेली रगडी जाये तो ताकतवर मनुष्य की ऊर्जा कमजोर मनुष्य मे परिवर्तित हो जाती है। ऐसे ही अगर आप ऊर्जा और ज्ञान के भंडार से युक्त गुरु के पास रहते हो तो दोनों का परिवर्तन कमजोर कुंडली में हो जाता है। ऐसे ही जैसे एक रेडियो स्टेशन से रेडियो तरंगों को विकिरित किया जाता है और छोटे-छोटे रेडियो उन्ही तरंगों से संचालित हो जाते हैं। बड़े नेट सर्वर से छोटे-छोटे सर्वर संचालित होते हैं। यह एक विज्ञान का नियम है। इसी प्रकार अच्छे ज्ञानी गुरु के पास ऊर्जा और ज्ञान का भंडार होता है। उसका सर्वर बहुत बड़ा होता है। अगर आपके कमजोर ग्रह हैं और अच्छे गुरु के सानिध्य में रहते हो तो आपके कष्ट भी दूर होंगे तथा आपको लाभ भी मिलेगा। लेकिन ज्ञानी गुरु की भी अपनी एक आचार संहिता होती है । उसको भी अपनी ऊर्जा और ज्ञान का सदुपयोग समाज कल्याण के लिए ही करना चाहिए। न कि समाज का दोहन करने के लिए। अगर ऐसा गुरु समाज का दोहन करता है तो उसको भी नरक लोक में जाना ही पड़ेगा क्योंकि उसका चित भी गलत कर्म के कारण पाप से भर जाएगा।
- आचार्य एचएस रावत धर्मगुरु