शाही के स्थान पर अब 'अमृत स्नान'.......
-सर्वप्रथम नईदुनिया ने शाही स्नान शब्द का मामला उठाया था
उज्जैन। सिंहस्थ/ महाकुंभ के दौरान संतों की निकलने वाली पेशवाई और शाही स्नान शब्द के मुगलकालीन होने का मामला सर्वप्रथम 'नईदुनिया' ने उठाया था। अखिल भारतीय किन्नर अखाड़े के तत्कालीन संरक्षक ऋषि अजय दास ने इसे मुगलकालीन निरूपित किया था। इन शब्दों पर मैंने तत्कालीन शंकराचार्य स्वरूपानंद जी के उत्तराधिकारी स्वामी अविमुक्तेश्वरानंदजी, ज्योतिर्विद एवं पंचांगकर्ता पं. आनंद शंकर व्यासजी, अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के तत्कालीन अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरी जी महाराज (अब कैलाश वासी) की प्रतिक्रिया ली थी। यह समाचार नईदुनिया इंदौर /उज्जैन के 30 जनवरी 2016 के अंक/ संस्करण में प्रकाशित हुआ था। तब मैं 'सिंहस्थ 2016' में नईदुनिया की विशेष रिपोर्टिंग कर रहा था। इसके साथ ही मैं वैष्णव/रामानंदी अखाड़े मंगलनाथ उज्जैन क्षेत्र का इंचार्ज भी था। मेरे सहयोगी के रूप में बड़नगर के साथी श्री राजेंद्र अग्रवाल भी सेवारत थे। आज उसका ही परिणाम है कि प्रयागराज महाकुंभ 2025 में पेशवाई और शाही स्नान शब्द हटा और सरकार एवं संतों की सहमति से शाही स्नान के स्थान पर 'अमृत स्नान' शब्द विभूषित हुआ। प्रयागराज महाकुंभ में अब 'अमृत स्नान' हो रहा है।
बता दे कि अखिल भारतीय किन्नर अखाड़ा के संस्थापक/संरक्षक ऋषि अजय दास ने फिल्म अभिनेत्री ममता कुलकर्णी के महामंडलेश्वर बनाए जाने पर भी अपनी कड़ी आपत्ति जताई थी। उन्होंने उन्होंने किन्नर अखाड़ा के आचार्य महामंडलेश्वर लक्ष्मीनारायण त्रिपाठी को भी पद से विमुक्त कर दिया। इस बात से अन्य अखाड़ों ने भी कड़ी आपत्ति जताई। अभी किन्नर अखाड़ा विवादों के घेरे में है। ऋषि अजय दास और किन्नर अखाड़ा के आचार्य महामंडलेश्वर लक्ष्मीनारायण त्रिपाठी के बीच गहरे मतभेद उभर चुके हैं।